Edited By National Desk, Updated: 21 Jun, 2026 07:36 PM
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर ओशो धाम में भी योग को लेकर अलग ही उत्साह देखा गया। इस विशेष अवसर पर ध्यान और योग के विभिन्न कार्यक्रमों में देश-विदेश से आए प्रतिभागियों ने ध्यान की रूपांतरणकारी शक्ति का जीवंत अनुभव किया। सुबह के सक्रिय ध्यान के बाद ओशो धाम के भव्य मेडिटेशन हॉल में 'प्राणयोग ध्यान' का मुख्य सत्र आयोजित किया गया। इस विशेष सत्र का संचालन ओशो वर्ल्ड के मुख्य संपादक और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ध्यान गुरु स्वामी चैतन्य कीर्ति ने किया। पतंजलि योग सूत्र और विज्ञान भैरव तंत्र के प्राचीन सूत्रों पर आधारित इस सत्र में ओशो के दृष्टिकोण को गहराई से समझाया गया।
ध्यान के बिना जीवन सतही और अधूरा: स्वामी चैतन्य कीर्ति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी चैतन्य कीर्ति ने योग और ध्यान के गहरे अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "योग महज़ शारीरिक कसरत या आसन नहीं है, बल्कि यह स्वयं को बदलने का एक संपूर्ण विज्ञान है। ओशो धाम का यह मानना है कि ध्यानयुक्त योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि हमारे मन और आत्मा को भी जगाता है। ध्यान के बिना मनुष्य का जीवन सतही, क्षणभंगुर और बेचैन बना रहता है। जब हम ध्यान के माध्यम से भीतर की ओर मुड़ते हैं, तभी वास्तविक आत्म-विकास की शुरुआत होती है।"
शारीरिक आसनों से परे 'आंतरिक रूपांतरण' पर ज़ोर
इस वर्ष ओशो धाम के इस आयोजन में योग के पारंपरिक शारीरिक स्वरूप से आगे बढ़कर इसके सूक्ष्म और गहरे आयामों-जैसे जागरूकता, साक्षी भाव और आंतरिक रूपांतरण-पर विशेष ज़ोर दिया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि योग का अंतिम लक्ष्य मन की शांति और आत्म-बोध है। प्रयोग के दौरान साधकों को अपनी सांस की स्वाभाविक लय और गति को बिना किसी फेरबदल के केवल 'देखने' (साक्षी होने) के लिए प्रेरित किया गया। "ओशो के अनुसार, सांस केवल ऑक्सीजन का लेन-देन नहीं है, बल्कि यह शरीर और आत्मा के बीच का एक जीवंत पुल है, जो बाहरी संसार को आंतरिक दिव्यता से जोड़ता है।" इसके साथ ही गहन ध्यान सत्रों के बाद इस आध्यात्मिक उत्सव का समापन बेहद आनंदमयी माहौल में हुआ। एक शानदार लाइव बैंड परफॉर्मेंस के साथ सभी प्रतिभागियों ने नृत्य और उत्सव का आनंद लिया। इस संगीत और आत्म-चिंतन के संगम ने कार्यक्रम में अनूठी रौनक बिखेर दी।