September 5th, 2024
223
Read More
ओशो अमेरिका से निर्वासन उपरांत विश्वभ्रमण करते हुए जब पुन: भारत स्थित अपने पुणे आश्रम पहुंचे, तो कुछ समय मौन रहे। लेकिन जिस दिन उनका यह मौन टूटा, उन्होंने जो सर्वप्रथम जो शब्द जोर देकर कहे थे, वे थे, ‘जबलपुर मेरा पर्वतस्थल है, जहां मैं सर्वाधिक आनंदित हुआ।’ सुरेंद्र दुबे, जबलपुर। ओशो अमेरिका से निर्वासन उपरांत विश्वभ्रमण करते हुए जब पुन: भारत स्थित अपने पुणे आश्रम पहुंचे, तो कुछ समय मौन रहे। लेकिन जिस दिन उनका यह मौन टूटा, उन्होंने जो सर्वप्रथम जो शब्द जोर देकर कहे थे, वे थे, ‘जबलपुर मेरा पर्वतस्थल है, जहां मैं सर्वाधिक आनंदित हुआ।’ दरअसल, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि संस्कारधानी उन्हें कितनी प्रिय थी। यही वजह है कि उन्होंने जबलपुर को अलविदा कहते समय शहीद स्मारक सभागार में आयोजित अपने सम्मान समारोह में साफ शब्दों में कह दिया था कि जबलपुर मेरे हाड़-मांस में बसा है, इस शहर को भुला पाना मेरे लिए असंभव होगा।
Recent News :
REVIEW
0 REVIEW TO "Osho Birthday Special : ओशो ने अमेरिका से लौटकर कहा था- जबलपुर मेरे हाड़-मांस में बसा, यहां मिला सर्वाधिक आनंद"
! Empty Comments yet.
Your email address will not be published