Edited By National Desk,Updated: 08 Dec, 2025 08:57 PM
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ओशो जन्मदिवस उत्सव के मौके पर दिल्ली के ओशो धाम में वैश्विक साधकों का संगम देखने को मिल रहा है। साथ ही विशेष कैंप का आयोजन भी किया जा रहा है। ओशो धाम के स्वामी चैतन्य कीर्ति का कहना है कि बढ़ते तनाव और मानसिक थकान के बीच लोग एक बार फिर आंतरिक शांति की ओर लौट रहे हैं। इसी तलाश में ओशो धाम युवाओं, परिवारों और आध्यात्मिक साधकों के लिए एक प्रमुख स्थल बनकर उभरा है। प्राकृतिक हरियाली, शांत वातावरण और ओशो की ध्यान विधियों का अद्भुत संयोजन इस स्थान को राजधानी की तेज़ रफ़्तार जीवनशैली से दूर एक प्रभावी विकल्प बनाता है। प्रतिदिन होने वाले डायनेमिक, कुंडलिनी, विपश्यना, ज़ेन, नटराज र नादब्रह्म जैसे सत्र यहाँ ने वालों को गहरी मानसिक शांति और ऊर्जा प्रदान करते हैं।
स्वामी चैतन्य कीर्ति का कहना है, "ओशो कहते हैं- जीवन को प्रेम करो, उसे पूरी संपूर्णता से जीओ। जब हम जीवन से प्रेम में डूब जाते हैं, तभी दिव्यता का उत्सव हमारे भीतर खिलता है। ओशो का संदेश हमें याद दिलाता है कि अस्तित्व की हर सांस, हर क्षण, उत्सव है। उनके जन्म दिवस पर हम न केवल उन्हें स्मरण करते हैं, बल्कि उस चेतना को भी नमन करते हैं जो हमें ध्यान, प्रेम और सृजन की राह पर चलने का निमंत्रण देती है। आइए, हम सब मिलकर इस पवित्र अवसर को मनाएं- अपने प्रिय भगवान की उपस्थिति को अपने हृदय में फिर से जाग्रत करते हुए"।
10 से 14 तक ओशो ध्यान दिवस समारोह
इसी वातावरण में धाम में हर वर्ष की तरह इस बार भी 10 से 14 दिसंबर 2025 तक ओशो ध्यान दिवस समारोह आयोजित हो रहा है। मा धर्म ज्योति और स्वामी चैतन्य कीर्ति द्वारा संचालित इस पाँच दिवसीय आयोजन में ध्यान, मौन, संगीत, नृत्य, सत्संग और उत्सव का संगम देखने को मिलेगा।समारोह का मुख्य आकर्षण होगा 11 दिसंबर, जिसे ओशो के जन्मदिवस पर ध्यान दिवस के रूप में मनाया जाता है। देश-विदेश से आने वाले साधक इस दिन को कृतज्ञता, प्रेम और अंतर्मन की गहराई से जुड़ने के रूप में देखते हैं। अनेक प्रतिभागियों के अनुसार, यह दिवस सामूहिक ऊर्जा का ऐसा अनुभव कराता है जो साधना को नए आयाम देता है।
ध्यान समारोह के बाद धाम दिसंबर के अंत में एक पारिवारिक पहल भी शुरू कर रहा है। 25 से 28 दिसंबर 2025 तक होने वाला बच्चों और अभिभावकों के लिए रेज़िडेंशियल कैंप परिवारों को भीतर से जोड़ने की दिशा में एक विशेष प्रयास है। “चिल्ड्रन एंड मेडिटेशन कैंप” में बच्चे नृत्य, खेल, हँसी, कला और ध्यान के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और आत्मविश्वास को स्वाभाविक रूप से विकसित कर सकेंगे। वहीं दूसरी ओर, “पेरेंटिंग इज़ ग्रेट आर्ट” कैंप में माता-पिता ध्यान और मौन के जरिए अधिक सहज, प्रेमपूर्ण और जागरूक अभिभावक बनने के तरीकों को समझेंगे।