Dhyan Sutra (ध्यान सूत्र)

175.00

In this book about the Sarvasar Upanishads Osho describes the search within, the search for the essence, for what is divine within man. “I warn you in advance that to involve oneslf in the teachings of an upanishad is like playing with fire. An Upanishad cannot be understood without you also becoming transformed.” (Osho) translated from Hindi : Sarvasar Upanishad (सर्वसार उपनिषद) notes “Spontaneous talks given to disciples and friends at a meditation camp in Matheran, Maharashtra, India” Jan 8, 1972 to Jan 16, 1972 number of discourses/chapters 17

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SKU: Dhyana Sutra Category: Product ID: 21959
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Description

महाबलेश्वर के प्राकृतिक वातावरण में ओशो द्वारा संचालित ध्यान शिविर के दौरान हुए प्रवचनों व प्रायोगिक ध्यान प्रयोगों का संकलन है यह पुस्तक। शरीर, विचारों और भावों की एक-एक परत से ग्रंथियों को विलीन करने की कला समझते हुए, ओशो हमें समग्र स्वास्थ्य और संतुलन की ओर लिए चलते हैं।
पुस्तक के कुछ अन्य विषय-बिन्दुः
• सेक्स उर्जा का सृजनात्मक उपयोग कैसे करें?
• क्रोध् क्या है? क्या है उसकी शक्ति?
• अहंकार को किस शक्ति में बदलें?
• वैज्ञानिक युग में अध्यात्म का क्या स्थान है?”
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