Mahavir Ya Mahavinash
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"महावीर की क्रांति इसी बात में है कि वे कहते हैं कोई हाथ ऐसा नहीं है जो तुम्हें आगे बढ़ाए। और किसी काल्पनिक हाथ की प्रतीक्षा में जीवन को व्यय मत कर देना। कोई सहारा नहीं है सिवाय उसके, जो तुम्हारे भीतर है और तुम हो। कोई और सुरक्षा नहीं है, कोई और हाथ नहीं है जो तुम्हें उठा लेगा, सिवाय उस शक्ति के जो तुम्हारे भीतर है, अगर तुम उसे उठा लो। महावीर ने समस्त सहारे तोड़ दिए। महावीर ने समस्त सहारों की धारणा तोड़ दी। और व्यक्ति को पहली दफा उसकी परम गरिमा में और महिमा में स्थापित किया है। और यह मान लिया है कि व्यक्ति अपने ही भीतर इतना समर्थ है, इतना शक्तिवान है कि यदि अपनी समस्त बिखरी हुई शक्तियों को इकट्ठा करे और अपने समस्त सोए हुए चैतन्य को जगाए, तो अपनी परिपूर्ण चेतन और जागरण की अवस्था में वह स्वयं परमात्मा हो जाता है।"—ओशो पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु: श्रमण का क्या अर्थ है तपश्चर्या का क्या अर्थ है विवेक का क्या अर्थ है? महावीर की शिक्षा का मूल आधार क्या है? महावीर अहिंसक नहीं, महावीर एक महाप्रेमी है?
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अनुक्रम
#1: मानवीय गरिमा के उदघोषक
#2: अंतर्दृष्टि की पतवार
#3: आत्म-दर्शन की साधना
#4: स्वरूप में प्रतिष्ठा
#5: व्यक्ति है परमात्मा
#6: असुत्ता मुनि
#7: अंतस-जीवन की एक झलक
#8: जीवन-चर्या के तीन सूत्र
#9: सत्य का अनुसंधान
#10: अहिंसा : आचरण नहीं, अनुभव है
#11: अहिंसा-दर्शन