GUNGE KERI SARKARA (Paper Back)
₹300
अकथ कहानी प्रेम की, कछु कही न जाय। गंूगे केरी सरकारा, खाइ और मुसकाय। एक-एक शब्द बहुमूल्य है। उपनिषद फीके पड़ जाते हैं कबीर के सामने। वेद दयनीय मालूम पड़ने लगता है। कबीर बहुत अनूठे हैं। बेपढ़े-लिखे हैं, लेकिन जीवन के अनुभव से उन्होंने कुछ सार पा लिया है। और चूंकि वे पंडित नहीं हैं, इसलिए सार की बात संक्षिप्त में कह दी है। उसमें विस्तार नहीं है। बीज की तरफ उनके वचन हैं- -बीज-मंत्र की भांति।   ओशो
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Name Gunge Keri Sarkar ISBN 9789350831960 Pages 240 Language Hindi Author Osho Format Paper Back