Dharm Sadhana Ke Sutra
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जीवन के विभिन्न पहलुओं पर ओशो द्वारा दिए गए दस प्रवचन \n \nसाधना के जगत में सहज प्रवेश के अत्यंत सरल सूत्र देते हुए ओशो कहते हैं : ‘सुबह जब आखिरी तारे डूबते हों, तब हाथ जोड़ कर उन तारों के पास बैठ जाएं और उन तारों को डूबते हुए, मिस्ट्री में खोते हुए देखते रहें। और आपके भीतर भी कुछ डूबेगा, आपके भीतर भी कुछ गहरा होगा। सुबह के उगते हुए सूरज को देखते रहें। कुछ न करें, सिर्फ देखते रहें। उगने दें। उधर सूरज उगेगा, इधर भीतर भी कुछ उगेगा। खुले आकाश के नीचे लेट जाएं और घंटे दो घंटे सिर्फ आकाश को देखते रहें तो विस्तार का अनुभव होगा। कितना विराट है सब, आदमी कितना छोटा है! फूल को खिलते हुए देखें, चिटकते हुए, उसके पास बैठ जाएं, उसके रंग और उसकी सुगंध को फैलते देखें। एक पक्षी के गीत के पास कभी रुक जाएं, कभी किसी वृक्ष ‍को गले लगा कर उसके पास बैठ जाएं। और आदमी के बनाए मंदिर-मस्जिद जहां नहीं पहुंचा सकेंगे, वहां परमात्मा का बनाया हुआ रेत का कण भी पहुंचा सकता है।’ \n \nसामग्री तालिका अनुक्रम: \n \n#1: धर्म परम विज्ञान है \n#2: ध्यान में मिटने का भय \n#3: परमात्मा की खोज \n#4: तीन सूत्र : बहना, मिटना, सर्व-स्वीकार \n#5: मनुष्य के ज्ञान का आधार \n#6 अमृत की उपलब्द्धि \n#7: प्राणों की प्यास \n#8: रहस्य का द्वार \n#9: जीवन की वीना का संगीत और प्रेम ही परमात्मा है \n#10: प्रेम ही परमात्मा है