विचार समझ से महत्वपूर्ण हो गए हैं, क्योंकि बहुत ममत्व हमने उनको दिया है। इस ममत्व को एकदम तोड़ देना जरूरी है। और तोड़ना कठिन नहीं है, क्योंकि यह बिलकुल काल्पनिक है। यह जंजीर कहीं है नहीं, केवल कल्पना में है। विचार के प्रति ममत्व का त्याग जरूरी है।
\nपहली बात: विचार के प्रति अपरिग्रह का बोध।
\nदूसरी बात: विचार के प्रति ममत्व का त्याग।
\nऔर तीसरी बात: विचार के प्रति तटस्थ साक्षी की स्थिति।"—ओशो
\nपुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु:
\nजीवन की खोज और मृत्यु का बोध
\nक्या हमारे मन स्वतंत्र हैं या परतंत्र?
\nकहां है इस सारे जगत का जीवन स्रोत?
\nनिर्विचार द्वार है सत्य का
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\nअनुक्रम
\n#1: जीवन की खोज
\n#2: अविचार
\n#3: स्वतंत्रता और आत्म-क्रांति
\n#4: विचार
\n#5: विचार: एक आत्मानुभूति
\n#6: निर्विचार