Osho World Online Hindi Magazine :: September 2012
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“धार्मिक व्यक्ति इस बात से शुरुआत करता है कि मुझे पता है या नहीं है और अब मैं सीखने निकलता हूं। फिर वह विनम्र होगा, फिर वह झुका हुआ होगा। फिर जहां से भी सीखने को मिल जाए, वह सीखेगा।” - ओशो
ओशो दर्शन
धार्मिकता कहां है?

मंदिर जाने से धर्म तक जाने का कोई संबंध नही है। मंदिर तक जाना एक बिलकुल भौतिक घटना है, शारीरिक घटना है...
धर्म और विज्ञानः एक बीज तो दूसरा वृक्ष!

विज्ञान का तो धर्म से विरोध हो भी सकता है, लेकिन धर्म का विज्ञान से विरोध असंभव है...
वास्तविक धर्म क्या है?

काश पूरी धरती पर यदि धार्मिकता फैल सके तो सारे धर्म विदा हो जाएंगे! और यह मनुष्य जाति के लिए एक महान वरदान होगा...
परमात्मा एक रूप अनेक!

‘‘यह कहा जाता है कि यह दृष्टांत-कथा सूफ़ी सद्गुरु इमाम मुहम्मद बाकिर से ही संबंधित है...
राम और रावण में वास्तविक भेद?

राम तो हम अपने को नहीं कह पाते। कहना तो चाहते हैं, कह नहीं पाते, वास्तविक कठिनाइयां हैं...
मनुष्य का नैतिकता से संबंध कैसा हो?

नैतिकता न तो किसी स्वर्ग से संबधित है, न किसी नर्क से। नैतिकता न तो किसी पुण्य से संबंधित है, न किसी पाप से...
ओशोधाम महापरिनिर्वाण दिवस एवं ओशो नवसंन्यास महोत्सव
ओशो कथा-सागर
आत्मविश्वास से मिली जीत...

जापान में कोई सौ वर्ष पहले एक छोटे से राज्य पर पड़ोस के बड़े राजा ने हमला बोल दिया। हमलावर राजा बड़ा है। आक्रामक बहुत शक्तिशाली है। कोई दस गुनी ताकत है उसके पास...
अहोभाव
बस यही एक अभीप्सा है

मौन के गहरे अतल में डूब जाऊं
छूट जाए यह...
रहस्यदर्शियों पर ओशो
संतों में कोहिनूर गोरख

गोरख एक श्रृंखला की पहली कड़ी हैं। उनसे नए प्रकार के धर्म का जन्म हुआ, अविर्भाव हुआ। गोरख के बिना न तो कबीर हो सकते हैं, न नानक हो सकते हैं, न दादू, ना वाजिद, न फरीद, न मीरा-गोरख के बिना ये कोई भी न हो सकेंगे। इन सब के मौलिक आधार गोरख में है। फिर मंदिर बहुत ऊंचा उठा। मंदिर पर बड़े स्वर्ण-कलश चढ़े। लेकिन नींव का पत्थर नींव का पत्थर है। और स्वर्ण-कलश दूर से दिखाई दे जाते है, लेकिन नींव के पत्थर से ज्यादा मूल्यवान नहीं हो सकते है...
ध्यान विधि
आंतरिक अंधकार को बाहर लाओ...

"शिव ने कहा: जब वर्षा ऋतु की चंद्रविहीन रात न उपलब्ध हो तो आंखें बंद करो और अपने समक्ष अंधकार को खोज लो...
ओशो जीवन रहस्य
टीके का गहरा प्रयोग!

टीके का प्रयोग एक बहुत ही गहरा प्रयोग है। लेकिन ठीक जगह पर हो, ठीक वस्तु का हो, ठीक नियोजित ढंग से लगाया गया हो। अन्यथा बेमानी है...
भारत एक सनातन यात्रा
प्रगतिशील कौन?

प्रगतिशील होने के लिए अनिवार्य है कि अतीत के ज्ञान को न पकड़ें। भविष्य के लिए ओपनिंग तभी हो सकती है जब हम अतीत के प्रति जोर से...
एक सवाल?

आप हजारों लोगों को संन्यास क्यों दे रहे हो?

संन्यास का अर्थ जानते हो? संन्यास का अर्थ है-मेरा अर्थ-जीवन को जीने की कला...

स्वास्थ्य
भोजन का आहिस्ता-आहिस्ता स्वाद...

तंत्र कहता है जीवंत बनो, क्योंकि जीवन ही परमात्मा है। जीवन के अतिरिक्त कोई परमात्मा नहीं है...
युवा-ज़ोन
युवा और नशा

नशीले पदार्थ सरकारों और धर्मों से अधिक शक्तिशाली प्रमाणित हुए हैं, क्योंकि किसी ने नशीले पदार्थ लेने वालों के मनोविज्ञान को...
ओशो-साहित्य परिचय


असंभव क्रांति
असंभव क्रांति पुस्तक ध्यान साधना शिविर, माथेरान में ओशो द्वारा दिये गये दस अमृत प्रवचनों अनुपम संकलन है। पुस्तक का प्रकाशन पुणे के ओशो मीडिया इंटरनेशनल ने किया है...
आस्तिक-नास्तिक
प्रस्तुत ओशो प्रवचन की डी.वी.डी. अपयु गई हिरई श्रृंखला के प्रवचन नं. 6 का सार है...
अपनी पहचान
प्रत्येक मनुष्य की एक पहचान होती है वह पहचान है परमात्मा का अंश होना...

गतिविधियां
ओशो वर्ल्ड गैलेरिया - महापरिनिर्वाण दिवस उत्सव

5 तारीख की संध्या नई दिल्ली स्थित ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में सदगुरू ओशो के पिताजी स्वामी देवतीर्थ भारती के महापरिनिर्वाण दिवस पर भजन-कीर्तन का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया...

ध्यान-जगत

चित्रकूट,
मध्य प्रदेश


एक दिवसीय ओशो भक्ति साधना आयोजित किया गया जिसमें 120 मित्रों की उपस्थिति रही। शिविर में 15 मित्रों ने नव-संन्यास दीक्षा ली...
हास्य ध्यान
‘अस्तित्व तुम्हारी उदासी की परवाह नहीं करता है। अगर तुम पूरे संसार को अपने साथ करना चाहते हो, सिर्फ मुस्कुराओ, और चारों तरफ देखो और तुम देखोगे वृक्ष हंस रहे हैं, फूल हंस रहे हैं’’  -ओशो
टैरो
अक्टूबर 2012 - मा दिव्यम नदीशा

जीवन, जिसे तुम जीवन कहते हो, जीवन नहीं है। यह तो केवल मरने की प्रतीक्षा है...
ओशोधाम-आगामी ध्यान शिविर
ओशो विपस्सना ग्रुप

13 से 19 अक्टूबर, 2012
संचालन - स्वामी शिव भारती
और मा योग मधु 
स्थान - ओशोधाम, नई दिल्ली 
फोन - 011-25319026, 25319027,
मोबाइल - 09717490340
  समाचार सार
 
  उत्तर प्रदेश, बिहार व मध्यप्रदेश के स्कूली बच्चों की उमड़ी भीड़
देशबन्धु, नई दिल्ली, 6 सितम्बर, 2012
पुस्तक मेले में आज दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों से आए स्कूली बच्चों ने पुस्तक मेले का...
यूनानी तर्क और भारतीय प्रज्ञा
नया इंडिया, नई दिल्ली, 6 सितम्बर, 2012
पश्चिम का विज्ञान, चूंकि यूनान के तर्क को मानकर चलता है, उसका कोई भी निष्कर्ष अस्थायी...
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