Osho World Online Hindi Magazine :: September 2012
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"बुद्ध कहते हैं, जीवन का बस इतना ही उपयोग हो सकता है कि जीते जी तुम दीया जला लो। ध्यान का दीया जला लो, बस इतना ही जीवन का उपयोग है। " -ओशो
ओशो दर्शन
भीतर का प्रकाश प्रार्थना से जलेगा...

दीए से, प्रकाश से तुम्हारी वास्तविक दशा का बोध होगा कि तुम कौन हो। तुम परमात्मा हो! तत्वमसि! तुम परमात्मा से इंच भर नहीं कम नहीं...
ध्यान का दीया

बुद्ध कहते हैं, जीवन का बस इतना ही उपयोग हो सकता है कि जीते जी तुम दीया जला लो। ध्यान का दीया जला लो, बस इतना ही जीवन का उपयोग है...
ज्ञान और मनुष्य

ज्ञान खंड मनुष्य की उपलब्धि है। अगर मनुष्य न हो तो धर्म होगा, ज्ञान नहीं होगा। जगत धर्म से चलता रहेगा। लेकिन ज्ञान नहीं होगा...
जीवन का परम् नियम है अनुशासन

जीवन का जो परम नियम है, जो उसका गहनतम अनुशासन है, डिसिप्लन है, उसे पहचान लेने की कला का नाम धर्म है...
संघर्ष या समर्पण

और अगर तुम पूरी तरह संघर्ष छोड़ दो तो तुम्हारी वहीं ऊंचाई है, जो परमात्मा की। ऊंचाई का एक ही अर्थ है-निर्भार हो जाना...
नानक के गीत

ये गीत शराबी के गीत हैं। इसलिए नानक कहे चले जाते हैं। या तो एक छोटे बच्चे की तरह, या एक शराबी की तरह। वे गुनगान करते हैं। उसमें बहुत हिसाब नहीं है...
रहस्यदर्शियों पर ओशो
संत रैदास

भारत का आकाश संतों के सितारों से भरा है। अनंत-अनंत सितारे है, यद्यपि ज्योति सबकी एक है। संत रैदास उन सब सितारों में ध्रुवतारा हैं-इसलिए कि शूद्र के घर में पैदा होकर भी काशी के पंडितों को भी मजबूर कर दिया स्वीकार करने को। महावीर का उल्लेख नहीं किया ब्राह्मणों ने अपने शास्त्रों में। बुद्ध की जड़ें काट डाली। बुद्ध के विचार को उखाड़ फेंका। लेकिन रैदास में कुछ बात है कि रैदास को नहीं उखाड़ सके और रैदास को स्वीकार भी करना पड़ा...
गतिविधियां
ओशो वर्ल्ड गैलेरिया -
नृत्य कला और सृजनात्मकता...


3 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में 'ओशो क्रिएटिविटी प्रदर्शनी' का आयोजन हुआ...

ध्यान-जगत

औरंगाबाद, महाराष्ट्र

ओशो ध्यान साधना ट्रस्ट की ओर से एक तीन दिवसीय ध्यान शिविर का आयोजन किया गया...
बाल जगत
कागज का इतिहास

जब लेखन विधि का आविष्कार हुआ तो सबसे पहले लोग लिखने के लिए भोजपत्र, चर्मपत्र या पेड़ों के पत्तों का प्रयोग किया करते थे। करीब 3000 साल बाद कागज का वास्तविक विकास हो सका। कागज का सर्वप्रथम आविष्कार चीन में 100 ईसा पूर्व हुआ था। 105 ईसा में चीन के हान राजवंश के सम्राट हो-ती-की के शासन काल में चीन सरकार तसाई लून के...
विशेष
आनंद और उत्सव

धार्मिकता, सभ्यता और संस्कृति ही भारत की अनूठी पहचान है। इस अनुपम छठा के कारण ही भारतीय सभ्यता...
ध्यान विधि
बुद्धि से हृदय की ओर

जब हृदय सक्रिय हो जाता है, तो तुम्हारे पूरे व्यक्तित्व, पूरी संरचना, पूरे तौर-तरीके को...
ओशो जीवन रहस्य
ध्यान और मंदिर

ध्यान के क्षण में, गहरी शांति और मौन के क्षण में, अगर आप गुलाब के फूल को सामने रख लें और इतने एकात्म हो...
भारत एक सनातन यात्रा
भ्रष्टाचार क्यों?

भ्रष्टाचार के होने के कारण अस्तित्व में छिपे हैं। यह कोई सिद्धांतों की बात नहीं है। और नेतागण चिल्लाते रहे हैं...
एक सवाल?

कृपया बताएं, क्या कोई ऐसा भी रास्ता है जिससे मनुष्य शांति पूर्ण बनकर रहें?

जो प्रश्न तुमने मुझसे पूछा है, वह मुझे लियो टालस्टॉय का स्मरण करा रहा है...

स्वास्थ्य
शरीर का आधार है मेरुदंड

मेरुदंड पूरे शरीर की आधारशिला है। और अगर मेरुदंड युवा है तो तुम युवा हो। और अगर मेरुदंड बूढ़ा है तो तुम बढ़े हो...
अपनी प्राण-शक्ति को मेरुदंड के ऊपर उठती...
युवा-ज़ोन
युवा और राजनीति

सब राजनीतिज्ञ उत्सुक हैं युवकों में, लेकिन युवको को राजनीतिज्ञो में उत्सुकता बिलकुल छोड़ देनी चाहिए। हां, राजनीति में उत्सुकता लेनी चाहिए, लेकिन इस हिसाब से कि हम समझ पायें...
ओशो-साहित्य परिचय

ओशो कथा-सागर
आंतरिक जागरूकता जरुरी है

उस सेचतना में, जिस आनंद का अनुभव हुआ है, अब मैं चाहता हूं, मैं भी परमात्मा का चोर हो जाऊं। अब आदमियों की संपदा में मुझे भी कोई रस...
अहोभाव
संन्यास ही परम जीवन- संगीत है
शून्य की नाव
पुस्तक में ध्यान-प्रयोगो पर आधारित ओशो प्रवचन है। जो सद्गुरु ओशो के ध्यान प्रक्रियाओं को समझने में सहायक बनाती है...
जीवन एक तिलिस्म
प्रस्तुत डी.वी.डी. में सांच सांच सौ सांच पुस्तक के प्रवचन नं. तीन का अपूर्व संकलन है। जिसमें तीन प्रश्नों का सद्गुरु ओशो ने समाधान निकाला है...
आनंद और उत्सव
प्रस्तुत ओशो प्रवचन की ए.सी.डी. में उत्सव और आनंद की मधुर बेला का समधुर मिश्रण है जिसके एक-एक बोल हृदय में मिश्री की मिठास...
आदमी अकेला है
धर्म का जन्म ही एकांत में है, एकाकीपन में है। जहां तक भीड़ है, जहां तक भीड़ में लगाव है, जहां तक भीड़ के बिना रहना क्षणभर को कठिन है...
ध्यान में डूबो
उक्त डी.वी.डी. में ध्यान और संबोधि का अनूठा मिश्रण समाया हुआ है। जो मनुष्य के कदम-कदम पर उपयोगी है...

हास्य ध्यान
"आनंद का स्वभाव शब्दातीत है। इशारे किए जा सकते है; जैसे कोई चांद की तरफ अंगुली उठाए। अंगुली चांद नहीं है। अंगुली से चांद का क्या लेना-देना! और कोई नासमझ हो तो अंगुली को पकड़ कर बैठ जाएं कि यही चांद है।"  -ओशो
टैरो
नवम्बर 2012 - मा दिव्यम नदीशा

मन अतीत को ही दोहराना चाहता है भविष्य में-सुंदरतम रूप में; अतीत को ही सजाना चाहता है भविष्य में। भविष्य अतीत का ही विस्तार है...
ओशोधाम-आगामी ध्यान शिविर
अप्प दीपो भव

9 से 15 नवम्बर , 2012
संचालन - मा योग शुक्ला 

स्थान - ओशोधाम, नई दिल्ली 
फोन - 011-25319026, 25319027,
मोबाइल - 09717490340
  समाचार सार
 
  धर्म और विज्ञान का अंतः संबंध
आज समाज, नई दिल्ली, 9 अक्टूबर, 2012
धर्म परिभाष्य नहीं है। जो बाह्य है उसकी परिभाषा हो सकती है...
जो तुम अपने लिए चाहते हो, वही सबके लिए चाहो
नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली, 8 अक्टूबर, 2012
महावीर ने कहा है, जो तुम अपने लिए चाहते हो, वही दूसरों के लिए भी चाहो...
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