Osho World Online Hindi Magazine :: May 2012
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ओशो दर्शन
अपने दीए आप बनो

गुरु तुम्हारी बैसाखी नहीं बनने वाला है। जो बैसाखी बन जाए तुम्हारी, वह तुम्हारा दुश्मन है, गुरु नहीं है। क्योंकि जो बैसाखी...

श्रवण सरल नहीं, बड़ी कला है

श्रवण सरल नहीं। श्रवण बड़ी कला है। आते-आते ही आती है। राग, द्वेष, मोह और तृष्णा के कारण धर्म-श्रवण नहीं हो पाता। पूर्वाग्रहों के कारण...

संतों की वाणी

असंतों की वाणी से सुगंध तो मिलनी कठिन है, दुर्गंध ही मिलेगी। संतों की वाणी से संतोष मिलेगा, क्योंकि संतोष सत्य की...

हम अनंत के यात्री हैं

जितने लोगों को लाभ हो सकता था, उन्होंने लाभ ले लिया; जो अभागे हैं, उनके लिए बैठे रहने से कुछ लाभ नहीं...

राजनीति, राजनेता और देश

प्रश्न: ओशो, इस देश के राजनेता देश को कहां लिए जा रहे हैं? समाजवाद का क्या हुआ?
भोलेराम! भोले ही रहे। राजनेताओं से, और...

जो जागा, वही बुद्ध

बुद्ध जागरण की अवस्था का नाम है। गौतम बुद्ध एक नाम है। ऐसे और अनेंकों नाम हैं
धम्मपद के अंतिम सूत्रों का दिन आ गया...

ओशो अमृत-पत्र

प्रभु को जानना है, तो स्वयं को जीतो

मनुष्य का मन दासता में है। हम अपने ही दास पैदा होते हैं। वासना की जंजीरों के साथ ही जगत में हमारा आना होता है। बहुत सूक्ष्म बंधन हमें बांधे हैं।
परतंत्रता जन्मजात है। वह प्रकृति प्रदत्त है। हमें उसे कमाना नहीं होता। मनुष्य पाता है कि वह परतंत्र है। पर, स्वतंत्रता अर्जित करनी होती है। उसे वही उपलब्ध होता है, जो उसके लिए श्रम और संघर्ष करता है। स्वतंत्रता के लिये मूल्य देना होता है...

ध्यान-विधि

ओशो सक्रिय ध्यान

सभी ओशो सक्रिय ध्यान विधियों की शुरुआत किसी क्रिया से होती है जो प्रायः सघन व शारीरिक होती है, जिसके पश्चात कुछ समय का मौन होता है। सभी विधियां संगीत के साथ की जाती हैं...

 ओशो कथा-सागर

आनंद कहां है?

जो बाहर है वह आनंद नहीं है, और जो भीतर है उसे खोजने कहां जाऊं? मैंने तो सब खोज छोड़ कर ही उसे पा लिया है।
मैं एक कथा कहता हूं। उस कथा में ही आपका उत्तर है...

जीवन का रूपांतरण - मा प्रेम वंदना

Ma Prem Vandanaअभी और यहां जीना - प्रत्येक क्षण

मोहिनी मदान, एक सुखी गृहस्थिन हैं। नोएडा में पति एवं बच्चों से भरापूरा परिवार है उनका। यूं तो वह कामकाजी महिला नहीं हैं, लेकिन पति के कार्यों में हाथ बटाती हैं। ओशो के संपर्क में आपका कैसे आना हुआ? इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया...

ओशो का ओशनिक साहित्य

Prem Yog प्रेम-योग और आनंद-योग

Anand Yog प्रस्तुत पुस्तकें लखनऊ के दिव्यांश पब्लिकेशन्स ने प्रकाशित की हैं। हिंदी पाठकों के लिए ये पुस्तकें नयी हैं क्योंकि ये ओशो की अंग्रेज़ी पुस्तकों का अनुवाद हैं। 
इन पुस्तकों के अनुवादक हैं: स्वामी ज्ञान भेद। 
एक फक्कड़ मसीहा, ओशो के जीवन वृत को नौ खंडों में लिखने के बाद भी स्वामी ज्ञान भेद निरंतर ओशो की अंग्रेज़ी भाषा की पुस्तकों के हिंदी अनुवाद में संलग्न हैं। उनका यह कार्य अत्यंत सराहनीय है... 

रहस्यदर्शियों पर ओशो

Budhdhhaभगवान बुद्ध

बुद्ध कहते हैं, तुम सिर्फ मेरा निमंत्रण स्वीकार करो। इस भवन में दीया जला है, तुम भीतर आओ। और यह भवन तुम्हारा ही है, यह तुम्हारी ही अंतरात्मा का भवन है। 
गौतम बुद्ध के संबंध में सात बातें।
पहली, गौतम बुद्ध दार्शनिक नहीं, द्रष्टा हैं...

स्वास्थ्य

आदमी होने की बीमारी

बीमारियों का इलाज चिकित्सक के पास है, लेकिन वह जो आदमी होने की बीमारी है, उस बीमारी का इलाज ध्यान के पास है।
मेडिसिन आदमी को ऊपर से शरीर की व्यवस्था और बीमारी से मुक्त करने की चेष्टा है। लेकिन ध्यान रहे, आदमी सब बीमारियों से मुक्त होकर भी आदमी...

ओशोधाम-आगामी ध्यान शिविर

बोर्न अगेन ग्रुप
11 से 17 मई, 2012 तक
संचालन - स्वामी रविन्द्र भारती
स्थान - ओशोधाम, नई दिल्ली
फोन - 011-25319026, 25319027
मोबाइल - 09717490340

आगामी कार्यक्रम-ओशो फिल्मोत्सव

गुड़गांव, हरियाणा
6 मई, सांय 4 से 7 बजे
स्थल: हुडा ज़िमखाना क्लब, सेक्टर-29
सम्पर्क: स्वामी अमृत उल्हास, 09050008988

नोएडा, उत्तर प्रदेश
27 मई, सांय 4 से 7 बजे
स्थल: कम्युनिटी सेंटर, सेक्टर-44, बोटनिकल मेट्रो स्टेशन के पास
सम्पर्क: 09910726372

 ओशो वर्ल्ड की गतिविधियां

ओशो वर्ल्ड गैलेरिया: मूर्ख दिवस

नई दिल्ली स्थित ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में 1 अप्रैल को मुल्ला नसरुद्दीन दिवस मनाया गया। ओशो वर्ल्ड फाउंडेशन में हर वर्ष इस दिन को इसी (मूर्ख दिवस) रूप में मनाया जाता है।

इस उपलक्ष में 1 तारीख को हास्य पर एक रंगारंग कार्यक्रम हुआ। जिसका उद्घाटन हास्य-व्यंग्य के सुप्रसिद्ध कवि श्री महेन्द्र अजनबी ने की...

ओशोधाम

ध्यान, उत्सव और संबोधि-महोत्सव

ओशोधाम में मार्च का महीना ध्यान, उत्सव और महोत्सवों भरा रहा। यहां 2 से 4 मार्च तक सूफ़ी इश्क ध्यान शिविर हुआ, जिसका संचालन स्वामी आनंद कुलभूषण ने किया। और 5 से 8 मार्च तक मेडिटेट-सेलिब्रेट हुआ...

गतिविधियाँ

बैंगलुरु, कनार्टक

2 से 4 अप्रैल, एक तीन दिवसीय मेडिटेशन रिट्रीट का सफल आयोजन हुआ फायर फ्लाइस रिज़ार्ट में। यह कार्यक्रम लाफ, डांस, सेलिब्रेट तथा मेडिटेट पर आधारित रहा। ध्यान-ग्रुप का संचालन स्वामी सत्य वेदांत के सान्निध्य में संपन्न हुआ।

ट्यूमेन, रूस

29 से 31 मार्च, स्वामी आनंद अर्हत के संचालन में त्रि-दिवसीय शिविर लगा। ध्यान में 35 मित्रों ने भाग लिया एवं 8 साधक नव-संन्यास में दीक्षित हुए।

विशेष रिपोर्ट

लखनऊ में ओशो फिल्म शो

गत् माह 1 अप्रैल को लखनऊ तथा आस-पास के अनेक क्षेत्रों के ओशो प्रेमियों ने ओशो फिल्म शो का आनंद लिया...

समाचार पत्रों में ओशो-वाणी

ओशो-दि मैन ऑफ मिलेनियम

जयपुर से दैनिक जलते दीप ने ‘अध्यात्म के लिए अहं त्यागें’ दिया 12 मार्च को। और दिल्ली के आज समाज पत्र ने ‘बोधिसत्व की करुणा अपार’ प्रकाशित किया 13 मार्च को...

हास्य-ध्यान

‘‘जब तुम वास्तव में हंसते हो तो अचानक मन विलीन हो जाता है। जहां तब मैं जानता हूं, नाचना और हंसना सर्वोत्तम, स्वाभाविक व सुगम द्वार हैं। यदि सच में ही तुम नाचो, तो सोच-विचार रुक जाता है। तुम नाचते हो, घूमते जाते हो, और एक भंवर बन जाते हो--सब सीमाएं, सब विभाजन समाप्त हो जाते हैं’’

-ओशो

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