Osho World Online Hindi Magazine :: September 2012
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"मनुष्य स्वयं का ही सृजन करके मनुष्यता का सृजन करता है। व्यक्ति ही समष्टि की इकाई है उसके द्वारा ही विकास है और क्रांति है। वह इकाई आप हैं।" -ओशो
रहस्यदर्शियों की जीवन कथा
दादू दयाल

कबीर की शिष्य परंपरा मे पांचवे राजस्थान के संत दादू संवत 1601 में अहमदाबाद में साबरमती नदी के तट पर लोदीराम नाम के ब्राह्मण को पानी में बहते मिले थे। 11 की उम्र में श्रीकृष्ण की भक्ति...
संत सुन्दरदास

संत सुन्दरदासजी एक कवि ही नहीं बल्कि एक महान संत, धार्मिक एवं समाज सुधारक थे। उनका जन्म जयपुर राज्य की पुरानी राजधानी देवनगरी दौसा में भूसरगोत्र के खंडेलवाल वैश्य कुल में...
अमीर खुसरो

खड़ी बोली हिन्दी के प्रथम कवि अमीर खुसरो एक सूफीयाना कवि थे और ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया के मुरीद थे। इनका जन्म सन् 1253 में हुआ था। इनके जन्म से पूर्व इनके पिता तुर्क में...
सुकरात

सुकरात (469-399 ई. पू.) यूनान का विख्यात दार्शनिक। सुकरात को सूफियों की भांति मौलिक शिक्षा और आचार द्वारा उदाहरण देना ही पसंद था। वस्तुतः उसके समसामयिक भी उसे सूफी...
ओशो दर्शन
भक्ति और परमात्मा

ज्ञान, कर्म, योग, उन सबका सार-सूत्र है प्रयास।
ज्ञान, कर्म, योग मनुष्य की चेष्टा पर निर्भर हैं...
अंधकार से प्रकाश की ओर...

आलोक के प्रति निराश होने का कोई कारण नहीं है। वस्तुतः अंधकार जितना घना होता है...
जीवन ही प्रभु है...

अगर जिदंगी में बड़ी यात्रा करनी हो और जीवन को उन महान रास्तों पर ले जाना हो कि जीवन में महानता का सूर्य...
पाप और पुण्य

भीतर का दीया जला हो, तो वह जो भी करे वह पुण्य होगा। हो सकता है ऊपर से दिखाई पड़े की यह तो पुण्य नहीं...
संन्यास और गैरिक वस्त्र

गैरिक वस्त्र तुम्हें भीड़ से अलग करने का उपाय है, तुम्हें व्यक्तित्व देने की व्यवस्था है; ताकि तुम भीड़ से भयभीत...
जोरबा दि बुद्धाः
एक नया मनुष्य


नया मनुष्य, मेरा विद्रोही जोरबा दि बुद्धा पूरे संसार को अपना घर होने का दावा करता हैं। इसमें जो कुछ भी है...
प्रबुद्धज़नों के ओशो पर विचार
"मुझे याद आता है की पहली बार मैंने 1967 रजनीश जी के विचार राजनीति के बारे में सुने थे। उस समय चुनाव भी थे। उनके प्रवचनों के टेप्स किसी परिचित ने आकर मुझे दिया था।। तब ओशो नाम इतना प्रचलित नहीं था। सभी लोग आचार्य रजनीश से ही जानते थे। ये टेप्स मुंबई के व्याख्यान के थे। और मुझे स्मरण है कि मैं उन टेप्स को सुनने के बाद बहुत प्रभावित हुआ कि, जिसका विरोध करना उन दिनों में लगभग घटिया बात मानी जाती थी,। कैसे कोई समाजवाद का विरोध कर सकता है। लेकिन उन्होंने समाजवाद की बेहद तर्कपूर्ण व्याख्या...
बाल जगत
कला का इतिहास

कला मानव मन की ऐसी रचनात्मक अभिव्यक्ति है जिसके माध्यम से वास्तविक और काल्पनिक स्थितियों को चित्रित किया जाता है। उसकी सुदंरता को कैनवास, पेपर, पत्थर और दीवारों पर उकेरा जाता है। आमतौर पर जब हम कला की बात करते हैं तब उसका अभिप्राय, वास्तुकला, मूर्तिकला और चित्रकला से होता है। कला विश्व की ऐसी कलात्मक और अनूठी पहचान है...
विशेष
ओशो का भोजन
-मा अमृत मुक्ति

भगवान रजनीश को भोजन में मटर और गोभी की सब्जी...
गतिविधियां
ओशो वर्ल्ड गैलेरिया - गुरुनानक दिवस

नयी दिल्ली स्थित ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में 20 नवंबर को गुरुनानक दिवस पर भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ओशो वाणी से हुई।

इसी दौरान बाल गायिका जपनीत कौर एव भाई बलजीत सिंह ने सबद-कीर्तन भजनों को गाया।
ध्यान विधि
अनुभव करो-मैं हूं

शिव ने कहाः हे कमल नयनी, मधुर स्पर्शी! गाते हुए, देखते हुए, स्वाद लेते हुए यह बोध बनाए रहो कि मैं हूं...
ओशो जीवन रहस्य
ओमः सार्वभौमिक सत्य

ओम जो है, वह परम बीज है; वह किसी एक चक्र का बीज नहीं है, वह परम बीज है; वह सातवें का प्रतीक है-या अनादि का प्रतीक है...
भारत एक सनातन यात्रा
क्या आध्यात्मिक क्रांति जरूरी है?

'क्या भारत में आध्यात्मिक क्रांति की आवश्यकता है?' इस संबंध में कुछ कहने के...
एक सवाल?

क्या सौ प्रतिशत शुभ संभव नहीं है?

जिस दिन तुम मन के बाहर होकर मुझे देखोगे, न मैं बुरा दिखाई पडूंगा, न भला; न साधु, न असाधु...

स्वास्थ्य
शुद्धता तन और मन की...

योग जानता है तीन शब्दों को, तीन गुणों कोः सत्व, रजस, तमस। सत्व है शुद्धता; रजस है ऊर्जा; तमस है बोझ, अंधकार...
युवा-ज़ोन
कैसा हो युवा चित्त?

क्या हम सीखते हैं, यह मूल्यवान नहीं है। कितना हम सीखते हैं-उस सीखने की प्रक्रिया से गुजरने वाली आत्मा निरंतर...
ओशो-साहित्य परिचय

ओशो कथा-सागर
मौत पीछा न छोड़ेगी...

यदि तुम ठीक छाया की ओर बढ़ो, जहां धूप न हो, तो परछाई गायब हो जायेगी क्योंकि परछाई धूप या रोशनी...
अहोभाव
प्रेम
एक नई मनुष्यता का जन्म
विद्रोह, क्रांति और नई मनुष्यता का बीज बोने वाली यह ओशो पुस्तक सत्य, धर्म और स्वतंत्रता का बोध कराती है...
ध्यान का दीया
प्रस्तुत ए.सी.डी. में 'प्रीतम छवि नैनन बसी' पुस्तक के प्रवचन नं. 9 का अपूर्व ऑडियो सकंलन है...
अहंकार और लोभ
'मृत्यु को जो सोचने लगता, विचारने लगता, उसके जीवन में क्रांति घटित होती है। धर्म असंभव था अगर मृत्यु न होती...
चार आर्य सत्य
प्रस्तुत ए.सी.डी. बुद्ध की देशनाओं की पुस्तक श्रृखंला 'एस धम्मों सनंतनो' से संकलित प्रवचनों को समाए हुए है...

हास्य ध्यान
"हास्य की क्षमता स्वयं की ओर इंगित होनी चाहिए-स्वयं पर हंसना बहुत बड़ी बात है और जो स्वयं पर हंस सकता है वह धीरे-धीरे दूसरों के प्रति करुणा और उत्तरदायित्व से भर जाता है। पूरी दुनिया में कोई घटना, कोई विषय हास्य को इस भांति से नहीं लेता है।"   -ओशो
टैरो
दिसम्बर 2012
- मा दिव्यम नदीशा


आदमी की गहरी इच्छा न तो धन की है, न पद की। आदमी की गहरी इच्छा परमात्मा की है। और जिस दिन आपको दिखाई पड़ जायेगा...
ओशोधाम-आगामी ध्यान शिविर
ओशो जन्मोत्सव

7 से 11 दिसम्बर, 2012
संचालन - मा धर्म ज्योति, मा योग नीलम
और स्वामी रवीन्द्र भारती
स्थान - ओशोधाम, नई दिल्ली 
फोन - 011-25319026, 25319027,
मोबाइल - 09717490340
  समाचार सार
 
  स्वतंत्रता से ही समता का संघर्ष संभव
नया इंडिया, नई दिल्ली, 21 नवंबर, 2012
समानता जो है, वह आज अगर नहीं है तो उसका कारण पूंजीवाद नहीं है...
भीतर के विभाजन को मिटाओ और बनो अखंड
आज समाज, नई दिल्ली, 8 नवंबर, 2012
ऐसा नहीं कि कुछ लोग विक्षिप्त हैं, बल्कि पूरी मनुष्यता ही विक्षिप्त है...
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