Osho World Online Hindi Magazine :: April 2013
www.oshoworld.com
 
  ओशो-साहित्य परिचय
 
 

जिन-सूत्र भाग-1

प्रस्तुत पुस्तक में भगवान महावीर के ‘समण-सुत्तं’ पर प्रश्नोत्तर सहित पुणे में ओशो द्वारा दिये गये 62 अमृत प्रवचनों में से 16 ( 01 से 16) अनुपम संकलन है। अपने प्रवचनों में  सदगुरु ओशो ने जैनों के 24वें तीर्थकर महावीर की छवि को अनूठा बताया हैं।

ओशो कहते हैं: ...महावीर से ज्यादा सुंदर महिमा-मंडित परमात्मा की कोई और छवि देखी है? महावीर से ज्यादा आलोकित, विभामय और विभूति देखी? कहीं और देखा है ऐसा ऐश्वर्य, जैसा महावीर में प्रकट हुआ? जैसी मस्ती और जैसा आनंद, और जैसा संगीत इस आदमी के पास बजा, कहीं और सुना है?

अंग्रेजी  भाषा की पुस्तक ‘जिन सूत्र वॊल्यूम वन’ से हिन्दी में अनुवादित इस पुस्तक का प्रकाशन दिव्यांश पब्लिकेशन हाउस ने किया है। ओशो के अनमोल प्रवचनों के इस साहित्य में कुल 484 पृष्ठ एंव मूल्य 550 रुपये मात्र है, साथ ही यह पुस्तक रंगीन और सजिल्द आवरण में उपलब्ध है।

जिन सूत्र भाग-2

‘महावीर क्या आए जीवन में हजारों-हजारों बहारें आ गई’। ओशो कहते हैं - ‘‘जिन-दर्शन गणित, विज्ञान जैसा दर्शन है। काव्य की उसमें कोई जगह नहीं। वही उसकी विशिष्टता है। दो और दो जैसे चार होते हैं, ऐसे ही महावीर के वकतव्य हैं। महावीर धर्म की परिभाषा करते हैं। जीवन के स्वभाव के सूत्र को समझ लेना धर्म है। जीवन के स्वभाव को पहचान लेना धर्म है। स्वभाव ही धर्म है। इसलिए महावीर के वचन भी नग्न हैं। उनमें कोई सजावट नहीं है। जैसा है वैसा कहा है।’’

ओशो की यह पुस्तक महावीर के सम्बंध ऐसे कई महत्वपूर्ण प्रवचनों को समेटे हुई है। जिन-सूत्र भाग दो में 62 प्रवचनों में से 15 (17 से 31) अमृत प्रवचनों का समावेश है।

ओशो की अंग्रेजी प्रवचनों की पुस्तक ‘जिन सूत्र वोल्यूम टू’ से इस पुस्तक का हिन्दी में अनुवाद किया गया है और प्रकाशन दिव्यांश पब्लिकेशन हाउस ने किया है। सजिल्द आवरण सहित इस पुस्तक में कुल 424 पृष्ठ हैं एवं मूल्य 550 रुपये है।

ओशो के अमृत प्रवचनों का यह साहित्य ओशो संन्यासियों एवं प्रेमियों के लिए बिक्री हेतु नई दिल्ली स्थित ओशो वर्ल्ड  गैलेरिया, ओशोधाम, और ओशो राजयोग ध्यान केन्द्र के अतिरिक्त हमारी ऑनलाइन वेबसाइट www.oshoworld.com पर भी उपलब्ध है।