Osho World Online Hindi Magazine :: April 2013
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  बाल जगत
 
 

खेलों का इतिहास

"तुम दौड़ रहे होओ और तुम्हारा शरीर सुंदर रूप से गति कर रहा हो; ताजी हवा, रात के अंधकार से गुजर कर जन्मा नया संसार-जैसे हर चीज गीत गाती हो-तुम बहुत जीवंत अनुभव करते हो...एक क्षण आता है जब दौड़ने वाला विलीन हो जाता है, और बस दौड़ना ही बचता है। शरीर, मन और आत्मा एक साथ कार्य करने लगते हैं;"

ओशो

मनोरंजन और शारीरिक स्फूर्ति के लिए खेलों का खेलना हमेशा प्रिय रहा है। खेल की प्रकृति चाहे जो भी हो परिणाम हमेशा, हमारे दिल, दिमाग और शरीर के लिए सकारात्मक ही होता है। इसीलिए खेलों का परचम घर की चारदीवारी से लेकर बड़े मैदानों  तक फैला हुआ है। आधुनिक खेलों में हार-जीत के मायनों ने अपनी अलग ही जगह बना ली है। लेकिन 'खेल की भावना' ने मुल्कों की सरहदों में भी प्रेम का बीज बोया है।

खेलों की संस्कृति का प्राचीन काल में उदय कैसे हुआ डालते हैं एक नजरः

इतिहासः
"खेल" यानि स्पोर्ट शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच शब्द "देसपोर्ट" से हुई हैं, जिसका समान्य अर्थ "अवकाश" होता है। और अवकाश का कई संदंर्भ में अर्थ लिया जा सकता है। जैसे दैनिक कार्यो से छुट्टी लेकर खेलना ताकि तन और मन में ताजगी का एहसास हो सके।

प्राचीन काल के कुछ चिन्हों से पता चलता है कि खेलों का उद्भव सबसे पहले चीन में हुआ। वहां के लोगों में 4000 ईसा पूर्व से ही खेलों में रुचि होने का पता चलता है। फराहों के स्मारकों में जो सकेंत मिलें उससे साफ स्पष्ट है कि यहां के लोग जिम्नास्टिक प्रेमी थे। इसके अलावा तैराकी और मछली पकड़ना भी उनका मनपसंद कार्य था। भाला फेंक, ऊंची कूद और कुश्ती इत्यादि खेलों को मिस्र में  नियमबद्ध तरीकों से खेला जाता था।

वही फारस के प्राचीन खेलों में 'जौरखानेह' जैसा पारंपारिक ईरानी मार्शल आर्ट का संबंध युद्ध कौशल से था। इसके अलावा पोलो खेल और सवारों का द्वंद्वयुद्ध शामिल था।

खेलों  के महाकुंभ यानि ओलम्पिक की शुरूआत ग्रीस से हुई। यह हर चार साल में पेलोपोनेसस नाम के एक छोटे से गांव में ओलंपिया नाम से आयोजित किये जाते थे। व्यापारिक गतिविधियों ने विकसित और विकासशील देशों में खेलों की परंपरा को बढ़ावा दिया। लोगों की पहुंच मैदानों से लेकर एथेलेटिक्स गतिविधियों में भी होने लगी। इस तरह खेलों का विस्तार होने लगा। संचार के साधनों ने भी खेलों को बढ़ावा दिया। जिससे खिलाड़ी और खेल की लोकप्रियता में चार चांद लगने लगे। खेल प्रशंसकों ने रेडियो, टेलीविजन और इंटरनेट के माध्यम से खेलों का लुत्फ उठाने लगे।

खेलों में तकनीकि का आगमनः
खेल विभाग में तकनीकि के आने से नये खेल उपकरण ईजाद हो गए। जिनकी सहायता से खेलना और निर्णय देना आसान हुआ। क्रिकेट, हॉकी, बास्केट बॉल  और तीरंदाजी में बेहतर उपकरण प्रयोग में आ गये हैं। तेज रफ्तार से दौड़ते भागते एथलीटों का चित्र इत्यादि खींचना सामान्य बात सी हो गई है। क्रिकेट के मैदान पर डीआरएस और हॉकी खेल में बेहतर हॉकी स्टिक और मैचों को सजीव प्रसारण इत्यादि सब टेक्नालाजी के कारण ही संभव हो सका है।

खेलों को सिर्फ व्यायाम के तौर पर नहीं देखा जा सकता है, ये आपका मनोरंजन भी करता है और दैनिक कार्यो  से नीरसता को दूर करता है। जिससे हमें मानसिक और शारीरिक थकान का एहसास नहीं होता है। खेल बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिसका बेहतर उपयोग वे अपने जीवन के कई आयामों में कर सकते हैं। खेलों से हमें प्रेरणा मिलती है कि कैसे हम विषम परिस्थितियों में भी खुद को मानसिक रूप से संयमित रखें और उन निर्णायक क्षणों में किस तरह से निर्णय लेते हैं। खेल हमारे भीतर टीम भावना और मिलजुल कर रहने की  प्रेरणा जगाते हैं। नई सदी में हो रहे विकास से खेल भी अछूता नहीं है नित नए खेल सामने आ रहे हैं जिसमें शारीरिक और मानसिक दोनों पहलूओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन खेलों को राष्ट्रयी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छी पहचान भी मिल रही है।